अवैध उत्खनन पर मेधा का गुस्सा, क्या साधुओं की समिति नर्मदा बचा पाएगी ?

अवैध उत्खनन पर मेधा का गुस्सा, क्या साधुओं की समिति नर्मदा बचा पाएगी ?
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भोपाल। नर्मदा बचाओ आंदोलन की रीढ़ कही जाने वाली सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने एक बार फिर शिवराज सरकार पर हमला बोला है. इस बार उन्होंने अवैध नर्मदा उत्खनन और साधु संतों को मंत्री बनाए जाने को लेकर प्रदेश सरकार को आड़े हाथो लिया. राजधानी भोपाल में मीडिया से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि नर्मदा नदी 100 किमी तक सूख चुकी है वहीं समुद्र 70 किमी तक आगे आ गया है. यह सब पिछले साल कम बारिश होने के चलते नहीं बल्कि नर्मदा की कछार, घाटी, जंगल, उपनदियां और पानी का आवंटन, अवैध उत्खनन का नतीजा है.

वही उन्होंने आरोप लगाया है कि नर्मदा नदी के संबंध में विविध प्रकार के ढिंढारे पीटने के बाद करोड़ों स्र्पए की यात्रा और योजनाओं पर खर्च किए जाने के बाद अब नई राजनीतिक चाल चली गई है. साधू संतों को राज्यमंत्री का दर्जा देकर शासन ने अपने साथ किया है.

उन्होंने कहा कि सबसे अधिक नुकसान विकास के नाम पर बनाए गए नर्मदा नदी पर और उप नदियों पर बनाए गए बड़े बांधों से और अवैध रेत खनन से हो रहा है.. सरदार सरोवर का डूब क्षेत्र और जलाशय भी खाली पड़ा है. उन्होंने बताया कि नर्मदा सेवा यात्रा और पौधरोपण के नाम पर करोड़ों खर्च करने वाले शासन ने अवैध रेत खनन को प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से प्रोत्साहित किया है. अवैध खनिज उत्खनन जारी है. ट्रैक्टर्स,नाव और बोट रंगे हाथ पकड़ने पर भी पुलिस खनिज विभाग या प्रशासन इन माफियाओं पर नकेल नहीं कर पा रही है.

साधु संतो मंत्री बनाकर उन्हें सरकार ने अपने साथ मिलाया है. यह सभी मिलकर जलस्त्रोत बचाने में क्या सफल हो पाएंगे? क्या सरकार का हिस्सा बनने के बाद ये सभी अवैध उत्खनन, गैर कानूनी, अन्यायपूर्ण कारनामों के खिलाफ आवाज उठा पाएंगे. उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या साधुओं की समिति नर्मदा बचा पाएगी.

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